पर्व · तिथि और मुहूर्त हर दिन स्वतः अद्यतन

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी · गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती

श्रीकृष्ण का अर्धरात्रि जन्म: व्रत, भजन और दही हांडी।

303 दिन में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अमांत: श्रावण कृष्ण अष्टमी)समय: नई दिल्ली (IST)

तिथि, मुहूर्त और समय

नियम: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत), अर्धरात्रि में

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: बुधवार, 25 अगस्त 2027 के समय, नई दिल्ली

मुहूर्त और समय
अष्टमी तिथि आरंभरात 8:25 (24 अगस्त)
अष्टमी तिथि समाप्तशाम 7:20
निशीथ काल (अर्धरात्रि)रात 12:01 (26 अगस्त) – रात 12:45 (26 अगस्त)
मध्यरात्रि क्षणरात 12:23 (26 अगस्त)
रोहिणी नक्षत्र आरंभदोपहर 12:28
रोहिणी नक्षत्र समाप्तसुबह 11:42 (26 अगस्त)
पारण (व्रत खोलने का समय)सुबह 5:55 (26 अगस्त) – सुबह 11:55 (26 अगस्त)
सूर्योदयसुबह 5:55
सूर्यास्तशाम 6:50

स्मार्त (गृहस्थ) तिथि। कुछ वर्षों में इस्कॉन एक दिन बाद मना सकता है।

इसके बाद अगली बार: रविवार, 13 अगस्त 2028

सभी समय नई दिल्ली के लिए, निरयन (लाहिरी) पंचांग से गणना। हर दिन अपने-आप अद्यतन होते हैं और पर्व बीतने पर अगली तिथि दिखाते हैं। नई दिल्ली का आज का पंचांग

जन्माष्टमी मथुरा के कारागार में आधी रात को हुए श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है। भक्त व्रत रखते हैं, पालना सजाते हैं, भजन गाते हैं और आधी रात को कान्हा का स्वागत करते हैं; अगले दिन दही हांडी होती है। यहाँ इस वर्ष की तिथि, निशीथ पूजा समय और रोहिणी का समय आपके शहर के अनुसार है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व और कथा

श्रीकृष्ण का जन्म कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ, और उफनती यमुना पार कर उन्हें गोकुल पहुँचाया गया। माखन-प्रिय नटखट बचपन और गीता के उपदेश उन्हें सबसे प्रिय अवतार बनाते हैं।

आदर्श क्षण है आधी रात को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र, जयंती योग। जब ये साथ न हों, तो पंचांग निश्चित नियम अपनाते हैं, इसलिए स्मार्त और इस्कॉन तिथियाँ कभी-कभी एक दिन अलग होती हैं।

पूजा विधि, चरण-दर-चरण

  1. स्वास्थ्य के अनुसार दिनभर व्रत रखें: फल-दूध, या निर्जला।
  2. झूला (पालना) और लड्डू गोपाल को नए वस्त्र और फूलों से सजाएँ।
  3. शाम को भजन गाएँ और कृष्ण जन्म की कथा पढ़ें।
  4. निशीथ काल में पंचामृत से अभिषेक कर वस्त्र पहनाएँ, पालने में बिठाएँ और आरती करें।
  5. माखन-मिश्री, पंजीरी और फल का भोग लगाएँ; परिवार की परंपरा के अनुसार आधी रात की पूजा के बाद या अगली सुबह व्रत खोलें।

पूजा सामग्री

  • लड्डू गोपाल और पालना
  • नए वस्त्र, बाँसुरी और मोरपंख
  • पंचामृत
  • माखन-मिश्री, पंजीरी, फल
  • तुलसी दल
  • दीया और घंटी

क्या करें

  • आधी रात की पूजा अपने शहर के निशीथ समय पर रखें।
  • बच्चों को शामिल करें: उन्हें कान्हा बनना बहुत भाता है।
  • दही हांडी में सावधानी रखें; सुरक्षा उपकरण और जाल प्रयोग करें।
  • गीता का एक अध्याय पढ़ें।

क्या न करें

  • व्रत में अन्न और मांसाहार से बचें।
  • बच्चों को दही हांडी के पिरामिड पर न चढ़ने दें।
  • दूध और माखन व्यर्थ न करें।
  • ऐसा व्रत न रखें जो स्वास्थ्य बिगाड़े।

हर राशि के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का एक छोटा संदेश

ये सामान्य, स्नेह भरे सुझाव हैं, कोई भविष्यवाणी नहीं। अपनी चंद्र राशि देखें।

  • मेष

    आपकी ख़ूबी: पहल करने का साहस। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।

  • वृषभ

    आपकी ख़ूबी: धैर्य और दृढ़ता। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।

  • मिथुन

    आपकी ख़ूबी: शीघ्र सीखना और लचीलापन। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।

  • कर्क

    आपकी ख़ूबी: सहानुभूति और भावनात्मक समझ। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।

  • सिंह

    आपकी ख़ूबी: स्वाभाविक नेतृत्व। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।

  • कन्या

    आपकी ख़ूबी: विश्लेषणात्मक सटीकता। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।

  • तुला

    आपकी ख़ूबी: कूटनीति और शिष्टता। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।

  • वृश्चिक

    आपकी ख़ूबी: गहराई और एकाग्रता। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।

  • धनु

    आपकी ख़ूबी: आशावाद और आस्था। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।

  • मकर

    आपकी ख़ूबी: अनुशासन और धैर्य। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।

  • कुंभ

    आपकी ख़ूबी: मौलिक, स्वतंत्र चिंतन। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।

  • मीन

    आपकी ख़ूबी: करुणा और दया। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बारे में सामान्य प्रश्न

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है?

अगला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत), अर्धरात्रि में। नई दिल्ली के लिए निशीथ काल (अर्धरात्रि): रात 12:01 (26 अगस्त) – रात 12:45 (26 अगस्त)। समय आपके शहर के अनुसार बदलते हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।

कुछ वर्षों में जन्माष्टमी की दो तिथियाँ क्यों?

स्मार्त (गृहस्थ) कैलेंडर आधी रात की अष्टमी मानते हैं, और अगले दिन आधी रात को रोहिणी हो तो कभी अगला दिन लेते हैं। इस्कॉन सूर्योदय की अष्टमी मानता है। नियम अलग हों तो दो तिथियाँ बनती हैं।

निशीथ पूजा क्या है?

रात के मध्य भाग की पूजा, श्रीकृष्ण के जन्म का समय। ऊपर का समय आपके शहर के लिए रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है।

व्रत कब खोलें?

कई लोग आधी रात की पूजा के बाद खोलते हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार अगले दिन अष्टमी और रोहिणी समाप्त होने के बाद खोला जाता है; हम सरल विकल्प के रूप में अगली सुबह का समय दिखाते हैं।

दही हांडी क्या है?

अगले दिन का उत्सव, विशेषकर महाराष्ट्र में, जहाँ टोलियाँ मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर टँगी दही की हांडी फोड़ती हैं, कान्हा के माखन-प्रेम की याद में।

ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?

हर पर्व एक नियम से तय होता है: चंद्र मास, पक्ष, तिथि और वह समय-खंड (जैसे प्रदोष, मध्याह्न या निशीथ) जिसमें तिथि होनी चाहिए। हमारा इंजन निरयन (लाहिरी) सूर्य-चंद्र से अगली बार वह योग खोजता है और चुने गए शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से मुहूर्त निकालता है। तिथियों का मिलान द्रिक पंचांग से किया गया है। जहाँ परंपराएँ अलग हैं (जैसे स्मार्त और वैष्णव), वहाँ हम उसे ऊपर बताते हैं, अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें।

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