पर्व · तिथि और मुहूर्त हर दिन स्वतः अद्यतन

एकादशी तिथियाँ · एकादशी व्रत कैलेंडर

हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, व्रत और विष्णु पूजा के लिए।

10 दिन में अगली: रमा एकादशीसमय: नई दिल्ली (IST)

एकादशी तिथियाँ की तिथियाँ

नियम: हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (महीने में दो बार)

अगले 12 महीने · नई दिल्ली (IST)

एकादशीतिथिएकादशी समयपारण
रमा एकादशीगुरुवार, 5 नवंबर 2026सुबह 11:04 (4 नवंबर) – सुबह 10:36सुबह 6:36 (6 नवंबर) – सुबह 8:47 (6 नवंबर)
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशीशुक्रवार, 20 नवंबर 2026सुबह 7:16 – सुबह 6:32 (21 नवंबर)सुबह 6:48 (21 नवंबर) – सुबह 8:55 (21 नवंबर)
उत्पन्ना एकादशीशुक्रवार, 4 दिसंबर 2026रात 11:04 (3 दिसंबर) – रात 11:45सुबह 6:59 (5 दिसंबर) – सुबह 9:04 (5 दिसंबर)
मोक्षदा एकादशीरविवार, 20 दिसंबर 2026रात 10:10 (19 दिसंबर) – रात 8:15सुबह 7:09 (21 दिसंबर) – सुबह 9:13 (21 दिसंबर)
सफला एकादशीरविवार, 3 जनवरी 2027दोपहर 2:25 (2 जनवरी) – शाम 4:09सुबह 7:14 (4 जनवरी) – सुबह 9:19 (4 जनवरी)
पौष पुत्रदा एकादशीसोमवार, 18 जनवरी 2027सुबह 10:28 – सुबह 7:50 (19 जनवरी)सुबह 7:14 (19 जनवरी) – सुबह 9:21 (19 जनवरी)
षटतिला एकादशीमंगलवार, 2 फ़रवरी 2027सुबह 8:42 (1 फ़रवरी) – सुबह 11:11सुबह 7:08 (3 फ़रवरी) – सुबह 9:19 (3 फ़रवरी)
जया एकादशीबुधवार, 17 फ़रवरी 2027रात 8:20 (16 फ़रवरी) – शाम 5:32सुबह 6:57 (18 फ़रवरी) – सुबह 9:12 (18 फ़रवरी)
विजया एकादशीगुरुवार, 4 मार्च 2027सुबह 4:45 (3 मार्च) – सुबह 7:25सुबह 6:42 (5 मार्च) – सुबह 9:02 (5 मार्च)
आमलकी एकादशीगुरुवार, 18 मार्च 2027सुबह 4:22 – रात 1:52 (19 मार्च)सुबह 7:13 (19 मार्च) – सुबह 8:51 (19 मार्च)
पापमोचनी एकादशीशुक्रवार, 2 अप्रैल 2027रात 12:46 – रात 2:53 (3 अप्रैल)सुबह 6:09 (3 अप्रैल) – सुबह 8:39 (3 अप्रैल)
कामदा एकादशीशनिवार, 17 अप्रैल 2027सुबह 11:22 (16 अप्रैल) – सुबह 9:28सुबह 5:53 (18 अप्रैल) – सुबह 7:43 (18 अप्रैल)
वरूथिनी एकादशीरविवार, 2 मई 2027शाम 6:54 (1 मई) – शाम 7:52सुबह 5:39 (3 मई) – सुबह 8:18 (3 मई)
मोहिनी एकादशीरविवार, 16 मई 2027शाम 6:18 (15 मई) – शाम 5:14सुबह 5:29 (17 मई) – सुबह 8:12 (17 मई)
अपरा एकादशीमंगलवार, 1 जून 2027सुबह 10:03 (31 मई) – सुबह 9:40सुबह 5:23 (2 जून) – सुबह 8:09 (2 जून)
निर्जला एकादशीसोमवार, 14 जून 2027रात 2:13 – रात 2:09 (15 जून)सुबह 5:22 (15 जून) – सुबह 8:10 (15 जून)
योगिनी एकादशीबुधवार, 30 जून 2027रात 10:05 (29 जून) – रात 8:31सुबह 5:26 (1 जुलाई) – सुबह 8:14 (1 जुलाई)
देवशयनी एकादशीबुधवार, 14 जुलाई 2027दोपहर 12:09 (13 जुलाई) – दोपहर 1:11सुबह 5:33 (15 जुलाई) – सुबह 8:18 (15 जुलाई)
कामिका एकादशीगुरुवार, 29 जुलाई 2027सुबह 7:35 – सुबह 5:14 (30 जुलाई)सुबह 5:41 (30 जुलाई) – सुबह 8:23 (30 जुलाई)
श्रावण पुत्रदा एकादशीगुरुवार, 12 अगस्त 2027रात 12:59 – रात 3:00 (13 अगस्त)सुबह 5:49 (13 अगस्त) – सुबह 8:27 (13 अगस्त)
अजा एकादशीशनिवार, 28 अगस्त 2027दोपहर 3:26 (27 अगस्त) – दोपहर 12:43सुबह 5:57 (29 अगस्त) – सुबह 8:31 (29 अगस्त)
परिवर्तिनी एकादशीशनिवार, 11 सितंबर 2027शाम 5:01 (10 सितंबर) – शाम 7:37सुबह 6:04 (12 सितंबर) – सुबह 8:33 (12 सितंबर)
इंदिरा एकादशीरविवार, 26 सितंबर 2027रात 10:31 (25 सितंबर) – शाम 7:50सुबह 6:11 (27 सितंबर) – सुबह 8:35 (27 सितंबर)
पापांकुशा एकादशीसोमवार, 11 अक्टूबर 2027सुबह 11:41 (10 अक्टूबर) – दोपहर 2:09सुबह 6:19 (12 अक्टूबर) – सुबह 8:38 (12 अक्टूबर)
रमा एकादशीसोमवार, 25 अक्टूबर 2027सुबह 5:41 – रात 3:23 (26 अक्टूबर)सुबह 6:28 (26 अक्टूबर) – सुबह 8:43 (26 अक्टूबर)

हर चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि एकादशी, भगवान विष्णु को समर्पित, हिंदू कैलेंडर का सबसे अधिक रखा जाने वाला व्रत है। वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं (अधिक मास वाले वर्ष में 26), हर एक का अपना नाम और कथा। नीचे अगले बारह महीनों की हर एकादशी और आपके शहर का पारण समय है।

एकादशी तिथियाँ का महत्व और कथा

एकादशी व्रत हल्केपन का है: शरीर को अन्न से विश्राम और मन को प्रार्थना का समय। हर एकादशी की पुराणों में कथा है, जैसे सबसे कठिन निर्जला एकादशी, और देवउठनी, जब विष्णु चातुर्मास से जागते हैं।

व्रत द्वादशी की सुबह पारण समय में खोला जाता है: सूर्योदय के बाद, द्वादशी के पहले चौथाई भाग (हरि वासर) के बाद, और संभव हो तो सुबह ही।

व्रत विधि

  1. दशमी की शाम हल्का भोजन करें।
  2. एकादशी को स्नान कर तुलसी और पीले फूलों से विष्णु पूजा करें और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें।
  3. अन्न और दालों से बचें; फल, दूध, मेवे, साबूदाना और कुट्टू प्रचलित हैं।
  4. उस दिन की एकादशी कथा या विष्णु सहस्रनाम पढ़ें।
  5. अगले दिन पारण समय में व्रत खोलें।

पूजा सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • फल और दूध
  • दीया
  • विष्णु सहस्रनाम

क्या करें

  • अपने शहर के पारण समय में व्रत खोलें।
  • फलाहार व्रत में पर्याप्त पानी पिएँ।
  • ज़रूरतमंद को भोजन दें।
  • मन शांत रखें।

क्या न करें

  • व्रत में चावल और अन्न से बचें।
  • हरि वासर में व्रत न खोलें।
  • अस्वस्थ, गर्भवती या मधुमेह हो तो निर्जला व्रत की ज़िद न करें।
  • क्रोध और निंदा से बचें।

एकादशी तिथियाँ के बारे में सामान्य प्रश्न

अगली एकादशी कब है?

अगली रमा एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली के लिए तिथि सुबह 11:04 (4 नवंबर) से सुबह 10:36 तक है।

पारण समय क्या है?

द्वादशी की सुबह व्रत खोलने का समय: सूर्योदय के बाद, द्वादशी के पहले चौथाई भाग के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले।

कुछ कैलेंडरों में दो दिन क्यों?

जब एकादशी दो सूर्योदयों तक रहे, पहला दिन गृहस्थों (स्मार्त) के लिए और दूसरा (गौण) अन्य के लिए होता है। हम गृहस्थ तिथि दिखाते हैं।

क्या एकादशी पर पानी पी सकते हैं?

हाँ, निर्जला एकादशी को कठोरता से न रख रहे हों तो। सौम्य व्रत पूरी तरह परंपरा में है।

वर्ष में कितनी एकादशियाँ होती हैं?

प्रायः 24; अधिक मास होने पर 26।

ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?

हर पर्व एक नियम से तय होता है: चंद्र मास, पक्ष, तिथि और वह समय-खंड (जैसे प्रदोष, मध्याह्न या निशीथ) जिसमें तिथि होनी चाहिए। हमारा इंजन निरयन (लाहिरी) सूर्य-चंद्र से अगली बार वह योग खोजता है और चुने गए शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से मुहूर्त निकालता है। तिथियों का मिलान द्रिक पंचांग से किया गया है। जहाँ परंपराएँ अलग हैं (जैसे स्मार्त और वैष्णव), वहाँ हम उसे ऊपर बताते हैं, अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें।

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