लाइव · हर कुछ मिनट में अद्यतन

आकाश, इसी क्षण

नौ ग्रह अभी किस राशि और नक्षत्र में हैं, वही निरयन (लाहिरी) गणना जो हमारी हर कुंडली रिपोर्ट में होती है।

अभी की स्थिति , सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीनचंमंगुकेशु℞सूबु℞राश℞रात 12:37 IST

नवग्रह अभी कहाँ हैं?

नवग्रहों की वर्तमान निरयन (लाहिरी) स्थिति
ग्रहराशिअंशनक्षत्र · पदगति
सूर्यतुला8°09′8°09′स्वाति · 1मार्गी+1.00°/दिन
चंद्रमेष3°07′3°07′अश्विनी · 1मार्गी+14.3°/दिन
मंगलकर्क21°12′21°12′आश्लेषा · 2मार्गी+0.52°/दिन
बुध ℞तुला26°35′26°35′विशाखा · 2℞ वक्री−0.21°/दिन
गुरुकर्क29°17′29°17′आश्लेषा · 4मार्गी+0.14°/दिन
शुक्र ℞तुला5°30′5°30′चित्रा · 4℞ वक्री−0.61°/दिन
शनि ℞मीन15°27′15°27′उत्तरा भाद्रपद · 4℞ वक्री−0.07°/दिन
राहुकुंभ2°10′2°10′धनिष्ठा · 3सदा वक्री (मध्यम)
केतुसिंह2°10′2°10′मघा · 1सदा वक्री (मध्यम)

अगले 30 दिन: राशि परिवर्तन, वक्री और ग्रहण

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में। ग्रहण की दृश्यता नई दिल्ली से आँकी गई है।

  1. पूर्णिमा

    पूर्णिमा · अश्विनी नक्षत्र

    सोमवार · सुबह 9:42 IST
  2. राशि परिवर्तन

    गुरु का सिंह में प्रवेश

    शनिवार · दोपहर 12:09 IST
  3. राशि परिवर्तन

    शुक्र का कन्या में वक्री प्रवेश

    शुक्रवार · रात 12:45 IST
  4. अमावस्या

    अमावस्या · विशाखा नक्षत्र

    सोमवार · दोपहर 12:32 IST
  5. राशि परिवर्तन

    मंगल का सिंह में प्रवेश

    गुरुवार · रात 8:18 IST
  6. मार्गी

    बुध मार्गी

    शुक्रवार · रात 9:23 IST
  7. मार्गी

    शुक्र मार्गी

    शनिवार · सुबह 5:53 IST
  8. राशि परिवर्तन

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

    सोमवार · शाम 7:43 IST
  9. राशि परिवर्तन

    शुक्र का तुला में प्रवेश

    रविवार · शाम 5:29 IST
  10. पूर्णिमा

    पूर्णिमा · कृत्तिका नक्षत्र

    मंगलवार · रात 8:24 IST

यह आकाश कैसे गणना किया जाता है?

हर ग्रह की स्थिति खगोलीय एफ़ेमेरिस से निकाली जाती है और फिर लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश घटाकर निरयन राशिचक्र में बदली जाती है, यही भारत सरकार के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है। राहु और केतु मध्यम चंद्र-पात हैं, इसलिए वे सदा वक्री दिखते हैं। स्थिति हर कुछ मिनट में दोबारा गणना होती है; ऊपर लिखा “अभी की स्थिति” समय बताता है कि आप कौन-सा क्षण देख रहे हैं।

वक्री ग्रह का क्या अर्थ है?

पृथ्वी से देखने पर कभी-कभी कोई ग्रह तारों के सापेक्ष उल्टी दिशा में चलता दिखता है। यह एक दृष्टि-प्रभाव है: ग्रह वास्तव में पीछे नहीं जाता। परंपरा में वक्री ग्रह को पुनर्विचार और पुराने कामों पर लौटने से जोड़ा जाता है। सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते।

यह पश्चिमी राशिफल से अलग क्यों है?

पश्चिमी (सायन) ज्योतिष ऋतुओं से जुड़ा राशिचक्र इस्तेमाल करता है, जबकि वैदिक ज्योतिष तारों से जुड़ा निरयन राशिचक्र। दोनों के बीच अभी लगभग 24° का अंतर है, इसलिए अधिकतर ग्रह यहाँ पश्चिमी पंचांग से एक राशि पीछे दिखते हैं।

ये गोचर आपकी कुंडली को कैसे छूते हैं?

शनि, गुरु और राहु-केतु के गोचर को आपकी जन्म-कुंडली से मिलाकर पढ़ने वाली रिपोर्ट।

शनि गोचर रिपोर्ट

आज का पंचांग   आज का राशिफल