आज का पंचांग
सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
विक्रम संवत 2083 · आश्विन (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत) · शुक्ल पक्ष
तिथिचंद्र दिवस
शुक्ल पूर्णिमा
समाप्त सुबह 9:41
फिर कृष्ण प्रतिपदा
वारसप्ताह का दिन
सोमवार
स्वामी: चंद्र
नक्षत्रचंद्र नक्षत्र
अश्विनी
समाप्त शाम 5:41
फिर भरणी
योगसूर्य + चंद्र
वज्र
समाप्त दोपहर 2:16
फिर सिद्धि
करणअर्ध तिथि
बव
समाप्त सुबह 9:41
फिर बालव समाप्त रात 8:24, फिर कौलव
सूर्य और चंद्र
- सूर्योदय
- सुबह 6:28
- सूर्यास्त
- शाम 5:41
- चंद्रोदय
- शाम 5:34
- चंद्रास्त
- सुबह 6:26
- सूर्य राशि
- तुला
- चंद्र राशि
- मेष
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त
- सुबह 11:42 – दोपहर 12:27
- ब्रह्म मुहूर्त
- सुबह 4:52 – सुबह 5:40
परंपरा से टाले जाने वाले काल
- राहु काल
- सुबह 7:52 – सुबह 9:16
- यमगंड
- सुबह 10:40 – दोपहर 12:04
- गुलिक काल
- दोपहर 1:29 – दोपहर 2:53
आने वाले 30 दिनों के गोचर
ग्रहों के राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना, पूर्णिमा-अमावस्या और ग्रहण, समय IST में।
- पूर्णिमा
पूर्णिमा · अश्विनी नक्षत्र
सोमवार · सुबह 9:42 IST - राशि परिवर्तन
गुरु का सिंह में प्रवेश
शनिवार · दोपहर 12:09 IST - राशि परिवर्तन
शुक्र का कन्या में वक्री प्रवेश
शुक्रवार · रात 12:45 IST - अमावस्या
अमावस्या · विशाखा नक्षत्र
सोमवार · दोपहर 12:32 IST - राशि परिवर्तन
मंगल का सिंह में प्रवेश
गुरुवार · रात 8:18 IST - मार्गी
बुध मार्गी
शुक्रवार · रात 9:23 IST - मार्गी
शुक्र मार्गी
शनिवार · सुबह 5:53 IST - राशि परिवर्तन
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
सोमवार · शाम 7:43 IST - राशि परिवर्तन
शुक्र का तुला में प्रवेश
रविवार · शाम 5:29 IST - पूर्णिमा
पूर्णिमा · कृत्तिका नक्षत्र
मंगलवार · रात 8:24 IST
आने वाले पर्व
अगले 30 दिनों के हिंदू पर्व, हर पर्व के पृष्ठ पर मुहूर्त, विधि और कथा।
यह पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त चुने गए शहर के अक्षांश-देशांतर से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित, सूर्य के ऊपरी किनारे के क्षितिज छूने के समय पर निकाले जाते हैं, जैसे छपे हुए पंचांगों में। तिथि, नक्षत्र, योग और करण निरयन (लाहिरी) सूर्य और चंद्र से निकलते हैं, और हर अंग का समाप्ति-समय मिनट तक खोजा जाता है। मास पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण व पश्चिम भारत) दोनों पद्धतियों में दिखाया गया है।
पंचांग हर दिन अपने-आप नया बनता है; इसके लिए किसी को कुछ लिखना नहीं पड़ता। त्योहारों की तिथियाँ स्थानीय परंपरा से थोड़ी अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी अनुष्ठान से पहले अपने पुरोहित या स्थानीय पंचांग से मिलान करें।
पंचांग के बारे में सामान्य प्रश्न?
पंचांग के पाँच अंग कौन-से हैं?
तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा-मंडल), योग (सूर्य और चंद्र के देशांतर का योग) और करण (आधी तिथि)। इन्हीं पाँच अंगों से “पंच-अंग” नाम बना है।
राहु काल क्या है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है; हर वार का एक निश्चित भाग राहु काल कहलाता है। परंपरा में इस समय नए काम शुरू करने से बचा जाता है। यह शहर के सूर्योदय के अनुसार बदलता है।
तिथि सूर्योदय से क्यों गिनी जाती है?
हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है, इसलिए जो तिथि सूर्योदय के समय चल रही होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है, भले ही वह दिन में समाप्त हो जाए।
आपके जन्म दिन का पंचांग
आपके जन्म की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का पारंपरिक अर्थ।
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