धनतेरस · धनत्रयोदशी, धन्वंतरि जयंती
दीपोत्सव का पहला दिन: लक्ष्मी, कुबेर, धन्वंतरि और नए बर्तन।
11 दिन में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (अमांत: आश्विन कृष्ण त्रयोदशी)समय: नई दिल्ली (IST)
तिथि, मुहूर्त और समय
नियम: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत), प्रदोष काल में
धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 के समय, नई दिल्ली
| त्रयोदशी तिथि आरंभ | सुबह 10:31 |
|---|---|
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | सुबह 10:48 (7 नवंबर) |
| पूजा मुहूर्त | शाम 6:02 – शाम 7:58 |
| प्रदोष काल | शाम 5:32 – रात 8:09 |
| वृषभ (स्थिर) लग्न | शाम 6:02 – शाम 7:58 |
| यम दीपदान (सूर्यास्त के बाद) | शाम 5:32 – रात 8:09 |
| सूर्योदय | सुबह 6:36 |
| सूर्यास्त | शाम 5:32 |
इसके बाद अगली बार: बुधवार, 27 अक्टूबर 2027
सभी समय नई दिल्ली के लिए, निरयन (लाहिरी) पंचांग से गणना। हर दिन अपने-आप अद्यतन होते हैं और पर्व बीतने पर अगली तिथि दिखाते हैं। नई दिल्ली का आज का पंचांग
धनतेरस से पाँच दिन का दीपोत्सव शुरू होता है। घर साफ़ कर रोशन किया जाता है, घर के लिए कुछ नया खरीदा जाता है और माँ लक्ष्मी, कुबेर और देव-वैद्य धन्वंतरि की पूजा होती है। यहाँ इस वर्ष की तिथि और शाम का पूजा मुहूर्त आपके शहर के अनुसार है।
धनतेरस का महत्व और कथा
“धन” यानी संपदा और “तेरस” यानी त्रयोदशी। यह दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए धन्वंतरि का है, इसलिए इसे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी कहा जाता है। स्वास्थ्य को पहला धन माना गया है।
एक लोककथा में अल्पायु राजकुमार की पत्नी ने पूरी रात दीपक जलाकर, गीत गाकर और दरवाज़े पर गहनों का ढेर लगाकर पति को जगाए रखा; सर्प रूप में आए यमराज चकाचौंध होकर लौट गए। इसी से धनतेरस की शाम दक्षिण दिशा में यम का दीपक जलाने की परंपरा है।
पूजा विधि, चरण-दर-चरण
- घर और मुख्य द्वार साफ़ करें; रंगोली और लक्ष्मी जी के आते हुए पदचिह्न बनाएँ।
- शाम के मुहूर्त में साफ़ कपड़े पर लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धन्वंतरि के चित्र रखें।
- घी का दीपक जलाएँ, फूल, रोली, चावल, मिठाई और सिक्के अर्पित करें, लक्ष्मी या कुबेर मंत्र का जप करें।
- परिवार के स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि से प्रार्थना करें।
- सूर्यास्त के बाद यम दीपक, चार बत्ती वाला दीया, घर के बाहर दक्षिण की ओर रखें।
- धातु, चाँदी या नया बर्तन खरीदें तो मुहूर्त में घर लाकर पहले पूजा में रखें।
पूजा सामग्री
- लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धन्वंतरि के चित्र
- घी के दीये और चार मुख वाला दीया
- सिक्के या नया बर्तन
- फूल, रोली, चावल, हल्दी
- मिठाई और साबुत धनिया
- रंगोली के रंग
क्या करें
- वही खरीदें जो उपयोगी और बजट में हो, स्टील का बर्तन, झाड़ू या धनिया भी पूरी तरह पारंपरिक है।
- द्वार और अँधेरे कोनों में दीपक जलाएँ।
- स्वास्थ्य के लिए एक कदम उठाएँ: टहलना, जाँच या कोई अच्छी आदत।
- पड़ोसियों और सहायकों के साथ मिठाई बाँटें।
क्या न करें
- सोना खरीदने के लिए उधार या ज़रूरत से ज़्यादा खर्च न करें; परंपरा भाव को महत्व देती है, कीमत को नहीं।
- धनतेरस की रात द्वार अँधेरा न छोड़ें।
- रीति के अनुसार नुकीली या टूटी वस्तुएँ उपहार में न दें।
- आराम न छोड़ें; त्योहार का सप्ताह लंबा है।
हर राशि के लिए धनतेरस का एक छोटा संदेश
ये सामान्य, स्नेह भरे सुझाव हैं, कोई भविष्यवाणी नहीं। अपनी चंद्र राशि देखें।
- मेष
आपकी ख़ूबी: पहल करने का साहस। इस ऊर्जा को वर्ष के एक स्पष्ट आर्थिक लक्ष्य में लगाएँ और दीपक धैर्य के लिए भी जलाएँ।
- वृषभ
आपकी ख़ूबी: धैर्य और दृढ़ता। सरल बजट या बचत की आदत शुरू करने का अच्छा दिन; छोटे, स्थिर कदम ही आपकी समृद्धि हैं।
- मिथुन
आपकी ख़ूबी: शीघ्र सीखना और लचीलापन। परिवार से किसी साझा लक्ष्य पर बात करें; योजना पर चर्चा से समृद्धि बढ़ती है।
- कर्क
आपकी ख़ूबी: सहानुभूति और भावनात्मक समझ। आज खुले मन से कुछ दें; जो है उसके प्रति कृतज्ञता ही आपके लिए लक्ष्मी का द्वार है।
- सिंह
आपकी ख़ूबी: स्वाभाविक नेतृत्व। इस ऊर्जा को वर्ष के एक स्पष्ट आर्थिक लक्ष्य में लगाएँ और दीपक धैर्य के लिए भी जलाएँ।
- कन्या
आपकी ख़ूबी: विश्लेषणात्मक सटीकता। सरल बजट या बचत की आदत शुरू करने का अच्छा दिन; छोटे, स्थिर कदम ही आपकी समृद्धि हैं।
- तुला
आपकी ख़ूबी: कूटनीति और शिष्टता। परिवार से किसी साझा लक्ष्य पर बात करें; योजना पर चर्चा से समृद्धि बढ़ती है।
- वृश्चिक
आपकी ख़ूबी: गहराई और एकाग्रता। आज खुले मन से कुछ दें; जो है उसके प्रति कृतज्ञता ही आपके लिए लक्ष्मी का द्वार है।
- धनु
आपकी ख़ूबी: आशावाद और आस्था। इस ऊर्जा को वर्ष के एक स्पष्ट आर्थिक लक्ष्य में लगाएँ और दीपक धैर्य के लिए भी जलाएँ।
- मकर
आपकी ख़ूबी: अनुशासन और धैर्य। सरल बजट या बचत की आदत शुरू करने का अच्छा दिन; छोटे, स्थिर कदम ही आपकी समृद्धि हैं।
- कुंभ
आपकी ख़ूबी: मौलिक, स्वतंत्र चिंतन। परिवार से किसी साझा लक्ष्य पर बात करें; योजना पर चर्चा से समृद्धि बढ़ती है।
- मीन
आपकी ख़ूबी: करुणा और दया। आज खुले मन से कुछ दें; जो है उसके प्रति कृतज्ञता ही आपके लिए लक्ष्मी का द्वार है।
धनतेरस के बारे में सामान्य प्रश्न
धनतेरस कब है?
अगला धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (पूर्णिमांत), प्रदोष काल में। नई दिल्ली के लिए पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 – शाम 7:58। समय आपके शहर के अनुसार बदलते हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है?
सोना, चाँदी, पीतल या स्टील के बर्तन, नई झाड़ू और साबुत धनिया, सब पारंपरिक हैं। कृतज्ञता से की गई छोटी, उपयोगी खरीद भी उतनी ही शुभ है।
यम दीपदान क्या है?
धनतेरस की शाम सूर्यास्त के बाद चार बत्ती का दीया घर के बाहर दक्षिण दिशा, यम की दिशा, में रखा जाता है, परिवार की दीर्घायु और सुरक्षा की प्रार्थना के साथ।
पूजा मुहूर्त में वृषभ लग्न क्यों?
वृषभ स्थिर लग्न है। परंपरा मानती है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। मुहूर्त प्रदोष, वृषभ लग्न और त्रयोदशी का मेल है।
क्या हर शहर में धनतेरस एक ही दिन है?
प्रायः हाँ, पर मुहूर्त स्थानीय सूर्यास्त और लग्न पर निर्भर है, इसलिए समय शहर के अनुसार बदलता है। ऊपर अपना शहर चुनें।
ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
हर पर्व एक नियम से तय होता है: चंद्र मास, पक्ष, तिथि और वह समय-खंड (जैसे प्रदोष, मध्याह्न या निशीथ) जिसमें तिथि होनी चाहिए। हमारा इंजन निरयन (लाहिरी) सूर्य-चंद्र से अगली बार वह योग खोजता है और चुने गए शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से मुहूर्त निकालता है। तिथियों का मिलान द्रिक पंचांग से किया गया है। जहाँ परंपराएँ अलग हैं (जैसे स्मार्त और वैष्णव), वहाँ हम उसे ऊपर बताते हैं, अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें।
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