होली · रंगवाली होली, धुलेंडी, फगुआ
रंगों का पर्व: आनंद, मित्रता और वसंत।
147 दिन में फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमासमय: नई दिल्ली (IST)
तिथि, मुहूर्त और समय
नियम: होलिका दहन का अगला दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, पूर्णिमांत)
होली: सोमवार, 22 मार्च 2027 के समय, नई दिल्ली
| पूर्णिमा तिथि आरंभ | शाम 6:22 (21 मार्च) |
|---|---|
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | शाम 4:14 |
| पूर्णिमा समाप्त | शाम 4:14 |
| सूर्योदय | सुबह 6:23 |
| सूर्यास्त | शाम 6:33 |
इसके बाद अगली बार: शनिवार, 11 मार्च 2028
सभी समय नई दिल्ली के लिए, निरयन (लाहिरी) पंचांग से गणना। हर दिन अपने-आप अद्यतन होते हैं और पर्व बीतने पर अगली तिथि दिखाते हैं। नई दिल्ली का आज का पंचांग
होली रंगों, मित्रता और वसंत का पर्व है। होलिका दहन के बाद सुबह लोग रंग और पानी से खेलते हैं, फिर गुजिया और ठंडाई लेकर मित्रों से मिलने जाते हैं। यहाँ इस वर्ष की तिथि और आपके शहर के आसपास के समय हैं।
होली का महत्व और कथा
होली राधा और कृष्ण के प्रेमपूर्ण खेल का उत्सव है (कहा जाता है कि ब्रज में कृष्ण ने राधा के गालों पर रंग लगाया था) और प्रह्लाद की कथा में भक्ति की जीत का भी। मथुरा-वृंदावन में यह कई दिन चलती है, बरसाना की लट्ठमार होली प्रसिद्ध है।
इसकी भावना समानता और क्षमा है: रंग सबको एक-सा बना देते हैं, और “बुरा न मानो, होली है” पुरानी शिकायतें पिघला देता है।
पूजा विधि, चरण-दर-चरण
- सुबह पहले श्रीकृष्ण या कुलदेवता को थोड़ा गुलाल अर्पित करें।
- बड़ों के चरणों में गुलाल लगाकर आशीर्वाद लें; फिर मित्रों और परिवार के साथ खेलें।
- सूखे प्राकृतिक रंग चुनें; रीति के अनुसार खेल सुबह तक रखें।
- स्नान और आराम के बाद दोपहर में मिठाई लेकर मित्रों से मिलें।
पूजा सामग्री
- प्राकृतिक गुलाल (हर्बल या फूलों का)
- गुजिया, मालपुआ, ठंडाई
- त्वचा और बालों के लिए नारियल तेल
- पुराने कपड़े
क्या करें
- खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल लगाएँ।
- किसी को रंग लगाने से पहले पूछें।
- हर्बल रंग प्रयोग करें और पानी बचाएँ।
- पालतू जानवरों को घर के अंदर और रंगों से दूर रखें।
क्या न करें
- मना करने वाले पर ज़बरदस्ती रंग न डालें।
- केमिकल रंग, अंडे या कीचड़ से बचें।
- राहगीरों या वाहनों पर गुब्बारे न फेंकें।
- गाड़ी चलानी हो या तबीयत ठीक न हो तो शराब और भाँग से बचें।
हर राशि के लिए होली का एक छोटा संदेश
ये सामान्य, स्नेह भरे सुझाव हैं, कोई भविष्यवाणी नहीं। अपनी चंद्र राशि देखें।
- मेष
आपकी ख़ूबी: पहल करने का साहस। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।
- वृषभ
आपकी ख़ूबी: धैर्य और दृढ़ता। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।
- मिथुन
आपकी ख़ूबी: शीघ्र सीखना और लचीलापन। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।
- कर्क
आपकी ख़ूबी: सहानुभूति और भावनात्मक समझ। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।
- सिंह
आपकी ख़ूबी: स्वाभाविक नेतृत्व। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।
- कन्या
आपकी ख़ूबी: विश्लेषणात्मक सटीकता। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।
- तुला
आपकी ख़ूबी: कूटनीति और शिष्टता। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।
- वृश्चिक
आपकी ख़ूबी: गहराई और एकाग्रता। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।
- धनु
आपकी ख़ूबी: आशावाद और आस्था। आज स्नेह के शब्द खुलकर कहें; आपका खुलापन जीवनसाथी और परिवार को बहुत प्रिय लगेगा।
- मकर
आपकी ख़ूबी: अनुशासन और धैर्य। प्रेम व्यावहारिक ढंग से दिखाएँ: खाना बनाएँ, योजना बनाएँ या हाथ बँटाएँ, जैसा आप सबसे अच्छा करते हैं।
- कुंभ
आपकी ख़ूबी: मौलिक, स्वतंत्र चिंतन। किसी प्रिय के साथ लंबी, इत्मीनान भरी बातचीत रखें; आज सुनना ही आपका उपहार है।
- मीन
आपकी ख़ूबी: करुणा और दया। स्वयं को भी स्नेह पाने दें; प्रेम को सहजता से स्वीकारना भी पर्व का हिस्सा है।
होली के बारे में सामान्य प्रश्न
होली कब है?
अगला होली सोमवार, 22 मार्च 2027 को है, होलिका दहन का अगला दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, पूर्णिमांत)। नई दिल्ली के लिए पूर्णिमा समाप्त: शाम 4:14। समय आपके शहर के अनुसार बदलते हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।
होली पूर्णिमा को है या अगले दिन?
होलिका दहन पूर्णिमा की शाम होता है और रंग अगले दिन खेले जाते हैं।
प्राकृतिक रंग कैसे बनाएँ?
पीले के लिए हल्दी-बेसन, गुलाबी के लिए चुकंदर, हरे के लिए सूखी मेहंदी और नारंगी के लिए टेसू (पलाश) के फूल पारंपरिक हैं।
लट्ठमार होली क्या है?
मथुरा के पास बरसाना और नंदगाँव की होली, जिसमें महिलाएँ कृष्ण के गाँव के पुरुषों को खेल-खेल में लाठियों से “भगाती” हैं, होली से कुछ दिन पहले।
होली को क्षमा का पर्व क्यों कहते हैं?
लोग उनसे भी मिलने जाते हैं जिनसे मनमुटाव था, और रंग व मिठाई से शुभकामना देते हैं। यह नई शुरुआत का दिन है।
ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
हर पर्व एक नियम से तय होता है: चंद्र मास, पक्ष, तिथि और वह समय-खंड (जैसे प्रदोष, मध्याह्न या निशीथ) जिसमें तिथि होनी चाहिए। हमारा इंजन निरयन (लाहिरी) सूर्य-चंद्र से अगली बार वह योग खोजता है और चुने गए शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से मुहूर्त निकालता है। तिथियों का मिलान द्रिक पंचांग से किया गया है। जहाँ परंपराएँ अलग हैं (जैसे स्मार्त और वैष्णव), वहाँ हम उसे ऊपर बताते हैं, अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता दें।
इस पर्व के साथ अपनी कुंडली भी समझें
विस्तृत कुंडली मिलान: दो व्यक्तियों के लिए संपूर्ण अष्टकूट (36 गुण) और कुंडली-से-कुंडली विश्लेषण।
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