शतभिषा नक्षत्र
Shatabhisha · स्वामी राहु · 6°40′ कुंभ – 19°60′ कुंभ
शतभिषा, 'सौ वैद्य', के देवता वरुण हैं और प्रतीक खाली वृत्त है। यह शोध, उपचार और एकांत का नक्षत्र है। जातक स्वतंत्र, गोपनीय, वैज्ञानिक और दार्शनिक होते हैं। राहु तकनीक और अपरंपरागत पद्धतियों में रुचि देता है। राशिचक्र में शतभिषा 6°40′ कुंभ से 19°60′ कुंभ तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 6°40′ कुंभ | धनु | Go (गो) |
| 2 | 10°00′ कुंभ | मकर | Sa (सा) |
| 3 | 13°20′ कुंभ | कुंभ | Si (सी) |
| 4 | 16°40′ कुंभ | मीन | Su (सू) |
शतभिषा दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा शतभिषा में हो तो जीवन राहु महादशा (18 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद गुरु दशा आती है।
गुण मिलान में शतभिषा की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (आदि) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (राक्षस) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा.
समान योनि (अश्व) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: अश्विनी.
शतभिषा के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
शतभिषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
शतभिषा का स्वामी राहु है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा राहु की होती है।
शतभिषा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: गो, सा, सी, सू।
शतभिषा का गण और नाड़ी क्या है?
गण: राक्षस, नाड़ी: आदि, योनि: अश्व।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।