पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
Purva Bhadrapada · स्वामी गुरु · 20°00′ कुंभ – 3°20′ मीन
पूर्वा भाद्रपद के देवता रुद्र से जुड़े अज एकपाद हैं। यह तीव्रता और आदर्शवाद का नक्षत्र है — उच्च उद्देश्य के लिए सामान्य को जला देना। जातक भावुक, सिद्धांतवादी, वाक्पटु होते हैं। गुरु ज्ञान और आध्यात्मिक झुकाव देता है। राशिचक्र में पूर्वा भाद्रपद 20°00′ कुंभ से 3°20′ मीन तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 20°00′ कुंभ | मेष | Se (से) |
| 2 | 23°20′ कुंभ | वृषभ | So (सो) |
| 3 | 26°40′ कुंभ | मिथुन | Da (दा) |
| 4 | 0°00′ मीन | कर्क | Di (दी) |
पूर्वा भाद्रपद दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा पूर्वा भाद्रपद में हो तो जीवन गुरु महादशा (16 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद शनि दशा आती है।
गुण मिलान में पूर्वा भाद्रपद की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (आदि) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (मनुष्य) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद.
समान योनि (सिंह) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: धनिष्ठा.
पूर्वा भाद्रपद के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पूर्वा भाद्रपद का स्वामी गुरु है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा गुरु की होती है।
पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: से, सो, दा, दी।
पूर्वा भाद्रपद का गण और नाड़ी क्या है?
गण: मनुष्य, नाड़ी: आदि, योनि: सिंह।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।