रेवती नक्षत्र
Revati · स्वामी बुध · 16°40′ मीन – 29°60′ मीन
रेवती, 'धनवान', अंतिम नक्षत्र है जिसके देवता यात्रियों के रक्षक पूषा हैं। प्रतीक मछलियों का जोड़ा है। यह सुरक्षित यात्रा, दया और पूर्णता का नक्षत्र है। जातक कोमल, उदार, कल्पनाशील और कमज़ोरों के रक्षक होते हैं। राशिचक्र में रेवती 16°40′ मीन से 29°60′ मीन तक फैला है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 16°40′ मीन | धनु | De (दे) |
| 2 | 20°00′ मीन | मकर | Do (दो) |
| 3 | 23°20′ मीन | कुंभ | Cha (चा) |
| 4 | 26°40′ मीन | मीन | Chi (ची) |
रेवती दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा रेवती में हो तो जीवन बुध महादशा (17 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद केतु दशा आती है।
गुण मिलान में रेवती की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (अंत्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, स्वाति, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (देव) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाति, अनुराधा, श्रवण.
समान योनि (गज) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: भरणी.
रेवती के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
रेवती नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रेवती का स्वामी बुध है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा बुध की होती है।
रेवती नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: दे, दो, चा, ची।
रेवती का गण और नाड़ी क्या है?
गण: देव, नाड़ी: अंत्य, योनि: गज।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।