पुष्य नक्षत्र
Pushya · स्वामी शनि · 3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क
पुष्य, 'पोषक', आरंभ के लिए सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है और इसके देवता देवगुरु बृहस्पति हैं। गाय के थन का प्रतीक निःस्वार्थ पोषण दर्शाता है। पुष्य जातक देखभाल करने वाले, ज़िम्मेदार और भरोसेमंद होते हैं। शनि का स्वामित्व अनुशासन जोड़ता है।
चार पद और नामाक्षर क्या हैं?
| पद | आरंभ | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | 3°20′ कर्क | सिंह | Hu (हू) |
| 2 | 6°40′ कर्क | कन्या | He (हे) |
| 3 | 9°60′ कर्क | तुला | Ho (हो) |
| 4 | 13°20′ कर्क | वृश्चिक | Da (डा) |
पुष्य दशा क्रम को कैसे प्रभावित करता है?
चंद्रमा पुष्य में हो तो जीवन शनि महादशा (19 वर्ष) से आरंभ होता है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे था। इसके बाद बुध दशा आती है।
गुण मिलान में पुष्य की क्या भूमिका है?
समान नाड़ी (मध्य) वाले नक्षत्र — जिनसे परंपरागत रूप से नाड़ी दोष बनता है: भरणी, मृगशिरा, पूर्वा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद. समान नक्षत्र पर भिन्न पद जैसी स्थितियों में परंपरा इसे निरस्त मानती है।
समान गण (देव) — गण कूट में पूर्ण 6 अंक: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, हस्त, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, रेवती.
समान योनि (मेढ़ा) — योनि कूट में पूर्ण 4 अंक: कृत्तिका.
पुष्य के बारे में लोग और क्या पूछते हैं?
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?
पुष्य का स्वामी शनि है। इस नक्षत्र में जन्म हो तो पहली विंशोत्तरी दशा शनि की होती है।
पुष्य नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
चारों पदों के पारंपरिक नामाक्षर: हू, हे, हो, डा।
पुष्य का गण और नाड़ी क्या है?
गण: देव, नाड़ी: मध्य, योनि: मेढ़ा।
शिशु के लिए नक्षत्र आधारित नाम
पद, नामाक्षर और अर्थ सहित नाम सूची।